उत्तरकाशी शहर मुख्य रूप से भागीरथी नदी के किनारे बसा हुआ है। भागीरथी, जिसे गंगा का मुख्य स्रोत माना जाता है, उत्तरकाशी जिले के ‘गौमुख’ (गंगोत्री ग्लेशियर) से निकलती है। यह नदी न केवल इस क्षेत्र की प्यास बुझाती है, बल्कि उत्तरकाशी के आध्यात्मिक अस्तित्व का आधार भी है। शहर के सुंदर घाटों पर होने वाली भागीरथी की आरती पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होती है।
उत्तरकाशी शहर की भौगोलिक स्थिति इसे और भी विशेष बनाती है क्योंकि यह शहर दो अन्य छोटी नदियों के बीच स्थित है—वरुणा और असी गंगा। वरुणा नदी उत्तरकाशी के उत्तर-पूर्व से बहती है, जबकि असी गंगा उत्तर-पश्चिम दिशा से आकर भागीरथी में मिल जाती है। इन्हीं दो नदियों (वरुणा और असी) के बीच स्थित होने के कारण इस स्थान की तुलना वाराणसी (काशी) से की जाती है, जो स्वयं वरुणा और असि नदियों के संगम पर बसा है।
भागीरथी के अलावा, उत्तरकाशी जिले में अन्य महत्वपूर्ण नदियाँ भी प्रवाहित होती हैं। जिले के पश्चिमी भाग में यमुना नदी बहती है, जिसका उद्गम प्रसिद्ध यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है। साथ ही, टोंस नदी भी इसी जिले के कुछ हिस्सों से होकर गुजरती है। उत्तरकाशी शहर के पास ‘मनेरी’ में भागीरथी पर एक विशाल बांध बना है, जिसे मनेरी भाली परियोजना के नाम से जाना जाता है, जो जलविद्युत उत्पादन का एक प्रमुख स्रोत है।
संक्षेप में कहें तो, उत्तरकाशी नदियों का वह पावन धाम है जहाँ भागीरथी की कल-कल ध्वनि और वरुणा-असी का संगम मन को शांति प्रदान करता है। यदि आप उत्तरकाशी आ रहे हैं, तो इन नदियों के तट पर बैठकर हिमालय की शुद्धता का अनुभव करना न भूलें।
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