उत्तरकाशी: सीमांत जनपद उत्तरकाशी के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक ‘माघ मेले’ (बाड़ाहाट का थौल) की रौनक उस समय हंगामे में बदल गई जब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि के रूप में मेले में शामिल होने पहुंचे। गंगोरी घाटी पुल के पास पहले से ही घात लगाए बैठे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री के काफिले को घेर लिया और उन्हें काले झंडे दिखाए।
क्या है विरोध का कारण?
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार और संबंधित विभाग उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दे उठाए:
- धराली आपदा की अनदेखी: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि धराली क्षेत्र में आई आपदा के बाद मंत्री और सरकार ने केवल खोखले आश्वासन दिए, धरातल पर पुनर्निर्माण का कोई ठोस कार्य नहीं हुआ।
- संगमचट्टी-अगोड़ा मार्ग की बदहाली: स्थानीय ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा माना जाने वाला संगमचट्टी-अगोड़ा मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क की मरम्मत न होने से ग्रामीणों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक
जैसे ही मंत्री का काफिला गंगोरी पुल के करीब पहुँचा, कार्यकर्ताओं ने सड़क पर आकर “वापस जाओ” के नारे लगाने शुरू कर दिए। पुलिस प्रशासन ने बीच-बचाव कर कार्यकर्ताओं को सड़क से हटाने की कोशिश की, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक होती रही। भारी सुरक्षा घेरे के बीच मंत्री के वाहन को आगे निकाला गया।
मंत्री का बयान
हंगामे के बावजूद मेले के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कुछ लोगों द्वारा किए जा रहे विरोध को “राजनीति से प्रेरित” करार दिया।
