उत्तरकाशी: उत्तरकाशी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित होने वाला ‘माघ मेला’ (बाड़ाहाट का थौल) अपनी पूरी भव्यता के साथ जारी है। राजनीतिक हलचल और तनाव के बावजूद, मेले के सांस्कृतिक मंच पर उत्तरकाशी की लोक कला और परंपराओं का जादू सिर चढ़कर बोला।
लोक संस्कृति और विरासत का संगम
मेले का औपचारिक उद्घाटन करते हुए कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्वलित किया। उन्होंने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि, “माघ मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी सदियों पुरानी लोक संस्कृति, अटूट आस्था और समृद्ध विरासत का जीवंत प्रतीक है। इन मेलों के माध्यम से ही हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है।”
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय कलाकारों ने रांसों, तांदी और केदार जन्य नृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने जब ढोल-दमोह की थाप पर हुड़का बजाते हुए मांगल और लोक गीत गाए, तो पूरा रामलीला मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मेले में आए दर्शकों के लिए पहाड़ी व्यंजनों के स्टाल और हस्तशिल्प के बाजार आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। दूर-दराज के गांवों से आए ग्रामीणों ने भी पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मेले की रौनक बढ़ाई।
व्यापार और मेल-मिलाप का मंच
माघ मेला उत्तरकाशी के लोगों के लिए न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह ऊनी वस्त्रों, जड़ी-बूटियों और स्थानीय उत्पादों के व्यापार का एक बड़ा केंद्र भी है। जिला प्रशासन ने मेले की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
